मोतियाबिंद (सफ़ेद मोतिया) आँख के प्राकृतिक लेंस का धीरे-धीरे धुंधला हो जाना है। यह आँख पर जमने वाली कोई परत नहीं है, और यह दवा की बूंदों, व्यायाम या सिर्फ़ लेज़र से ठीक नहीं होता — धुंधले लेंस को निकालकर उसकी जगह कृत्रिम लेंस (IOL) लगाना पड़ता है।
ShivAnuj आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन डॉ. अनुज कोडनानी (MS Ophthalmology, DNB, FTVPEI, FWCRS) द्वारा, Alcon Centurion मशीन पर बिना ब्लेड के माइक्रो-इंसीज़न फेकोइमल्सीफिकेशन से, अलग मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में किया जाता है।
ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?
"मोतियाबिंद पकने तक रुको" वाली सलाह पुराने ज़माने की है। आज की तकनीक में ज़्यादा पका हुआ मोतियाबिंद निकालना असल में ज़्यादा कठिन होता है। फ़ैसला इस पर होता है कि आपको रोज़ के काम में कितनी दिक्कत है।
ऑपरेशन पर आमतौर पर तब बात होती है जब:
- रात में गाड़ी की लाइट से चकाचौंध या रोशनी के गोले दिखें
- पढ़ने के लिए ज़्यादा रोशनी चाहिए, या अक्षर फीके/पीले लगें
- चश्मे का नंबर बार-बार बदले और फ़ायदा न हो
- चेहरे पहचानने, टीवी देखने या दाम पढ़ने में दिक्कत हो
- ड्राइविंग लाइसेंस की आँखों की जाँच में फ़ेल हों
- मोतियाबिंद इतना घना हो कि पर्दे (रेटिना) की जाँच या इलाज में रुकावट आए
अगर मोतियाबिंद हल्का है और आपका काम ठीक चल रहा है, तो ऑपरेशन की कोई मजबूरी नहीं। समय-समय पर जाँच करवाते रहें।
ऑपरेशन कैसे होता है
- सुन्न करने वाली बूंदें डाली जाती हैं। आप जागे रहते हैं, पर दर्द नहीं होना चाहिए।
- कॉर्निया के किनारे पर एक छोटा, अपने-आप बंद होने वाला चीरा (लगभग 2.2 मिमी) लगाया जाता है।
- अल्ट्रासाउंड से धुंधले लेंस को तोड़कर निकाला जाता है।
- मुड़ा हुआ नया लेंस उसी छोटे चीरे से अंदर डाला जाता है, जो अंदर जाकर खुल जाता है।
सामान्य केस में ऑपरेशन लगभग 15–20 मिनट का होता है और आप उसी दिन घर जाते हैं। चीरा आमतौर पर अपने-आप बंद हो जाता है, टांकों की ज़रूरत नहीं पड़ती।
ऑपरेशन से पहले सही नाप
ऑपरेशन के बाद कितना साफ़ दिखेगा, यह काफ़ी हद तक ऑपरेशन से पहले आँख के सही नाप और सही लेंस चुनने पर निर्भर करता है। इसके लिए ZEISS IOLMaster 700 बायोमेट्री और OCT से पर्दे की जाँच की जाती है।
कौन सा लेंस चुनें
कोई एक "सबसे अच्छा" लेंस नहीं होता — वह लेंस सही है जो आपकी आँखों, आपके काम और आपकी ज़रूरत के हिसाब से हो।
| लेंस | क्या मिलता है | ध्यान रखें |
|---|---|---|
| मोनोफोकल | एक दूरी पर साफ़ नज़र, आमतौर पर दूर की | पढ़ने का चश्मा लगेगा। सबसे भरोसेमंद विकल्प। |
| EDoF / एन्हांस्ड | दूर + बीच की दूरी (कंप्यूटर, डैशबोर्ड) | बारीक अक्षरों के लिए चश्मा लग सकता है। |
| ट्राइफोकल | दूर, बीच और पास — तीनों | चश्मे की ज़रूरत सबसे कम, पर रात में रोशनी के गोले ज़्यादा दिख सकते हैं। |
| टॉरिक (ऊपर में से कोई भी) | सिलिंड्रिकल नंबर भी ठीक करता है | सटीक नाप और सही दिशा में लगाना ज़रूरी। |
खर्च: मोतियाबिंद का ऑपरेशन हर आँख के हिसाब से होता है और खर्च मुख्यतः चुने गए लेंस पर निर्भर करता है। जाँच और लेंस तय होने के बाद लिखित अनुमान दिया जाता है। वर्तमान पैकेज के लिए +91 94289 74800 पर कॉल करें।
ऑपरेशन के बाद
- उसी दिन: थोड़ी देर निगरानी के बाद घर। नज़र थोड़ी धुंधली रह सकती है।
- पहला हफ़्ता: बताई गई दवा की बूंदें समय पर डालें; आँख न मलें, धूल और तैराकी से बचें। सिर नीचे करने और भारी वज़न उठाने से बचें।
- 2–4 हफ़्ते: दवा धीरे-धीरे कम होती है; ज़्यादातर सामान्य काम शुरू।
- 4–6 हफ़्ते: अगर चश्मा चाहिए तो आँख स्थिर होने पर नंबर तय होता है।
अगर दर्द बढ़े, नज़र अचानक कम हो, आँख बहुत लाल हो या पानी/मवाद आए, तो तुरंत संपर्क करें। ऐसा कम होता है, पर इसकी जाँच तुरंत होनी चाहिए।
जोखिम
मोतियाबिंद का ऑपरेशन दुनिया में सबसे ज़्यादा किए जाने वाले ऑपरेशनों में से है और गंभीर जटिलताएँ कम होती हैं — पर शून्य नहीं। संभावित समस्याओं में संक्रमण, पर्दे में सूजन, लेंस की थैली (कैप्सूल) फटना, आँख का प्रेशर बढ़ना, पर्दा खिसकना (रेटिनल डिटैचमेंट) और अपेक्षा से अलग नंबर आना शामिल हैं। महीनों या सालों बाद लेंस के पीछे की झिल्ली धुंधली हो सकती है, जिसे क्लिनिक में थोड़े समय के YAG लेज़र से ठीक किया जाता है। आपका व्यक्तिगत जोखिम सहमति से पहले आपसे चर्चा किया जाता है।
दूसरी आँख
दोनों आँखों में मोतियाबिंद हो तो ऑपरेशन अलग-अलग दिन, थोड़े अंतर पर किए जाते हैं, ताकि दूसरी आँख से पहले पहली आँख की जाँच हो सके।
मरीज़ अक्सर पूछते हैं
क्या मोतियाबिंद के ऑपरेशन में दर्द होता है?
आँख को बूंदों से सुन्न किया जाता है, इसलिए ऑपरेशन में दर्द नहीं होना चाहिए। ज़्यादातर लोगों को हल्का दबाव या रोशनी दिखती है। बाद में एक-दो दिन हल्की चुभन या पानी आना आम है।
क्या रात को भर्ती रहना पड़ता है?
नहीं। यह डे-केयर ऑपरेशन है — उसी दिन थोड़ी निगरानी के बाद घर। घर ले जाने के लिए किसी को साथ लाएँ।
काम पर कब लौट सकते हैं?
ऑफ़िस/डेस्क का काम अक्सर कुछ दिनों में। धूल या भारी काम में ज़्यादा समय लगता है। डॉक्टर आपकी आँख और काम देखकर सलाह देंगे।
क्या ऑपरेशन के बाद भी चश्मा लगेगा?
यह लेंस पर निर्भर है। मोनोफोकल लेंस के साथ पढ़ने का चश्मा लगेगा। EDoF और ट्राइफोकल चश्मे की ज़रूरत कम करते हैं, पर कोई लेंस यह गारंटी नहीं देता कि कभी चश्मा नहीं लगेगा।
क्या दोनों आँखों का ऑपरेशन एक ही दिन हो सकता है?
हमारी सामान्य पद्धति में दोनों आँखें अलग-अलग दिन की जाती हैं, ताकि पहली आँख की जाँच के बाद दूसरी तय हो।
मुझे डायबिटीज़ है। क्या ऑपरेशन हो सकता है?
हाँ, यह आम है। पहले पर्दे (रेटिना) की जाँच होती है और शुगर कंट्रोल देखा जाता है। डायबिटीज़ में ऑपरेशन के बाद ज़्यादा फ़ॉलो-अप की ज़रूरत होती है।
क्या बीमा में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कवर होता है?
भारत में ज़्यादातर हेल्थ पॉलिसी इसे कवर करती हैं, पर अक्सर सब-लिमिट और वेटिंग पीरियड होते हैं, और प्रीमियम लेंस पूरा कवर नहीं हो सकता। अपनी पॉलिसी साथ लाएँ, हमारी टीम जाँचने में मदद करेगी।
ShivAnuj आई हॉस्पिटल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर
यह पेज केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है, डॉक्टर की जाँच का विकल्प नहीं। कोई भी जाँच या इलाज आपके लिए सही है या नहीं, यह आँखों/शरीर की जाँच के बाद ही तय होता है।
